पटाखों पर प्रतिबन्ध का फैसला सही या गलत, आपकी राय

पटाखों पर प्रतिबन्ध लगाने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने पारित किया है जिससे के देश में एक नयी बहस शुरू हो गयी है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एनसीआर में 1 नवंबर तक बिक्री पर रोक लगा दी है। प्रत्येक वर्ष पटाखों और आतिशबाज़ी के चलते दिवाली के समय वायु प्रदुषण में काफी इजाफ़ा हो जाता था। अब सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर प्रतिबन्ध लगाते हुए कहा कि पटाखों पर रोक लगनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट यह देखना चाहती है कि इस प्रतिबन्ध से प्रदूषण के स्तर में कुछ सुधार होता है या नहीं।

क्यों सही है पटाखों पर प्रतिबन्ध

पटाखों में कई तरह के विषैले रसायन होते है और जब पटाखें फोड़े जाते है तो उनमें से यह रसायन निकलता है जो के लिए भी जानलेवा सिद्ध हो सकता है। बच्चों और बुजुर्गों पर तो इन विषैले रसायन का ज्यादा प्रभाव पड़ता है। इसके इलावा पटाखों और आतिशबाज़ी से एक ही रात में वायु प्रदूषण बहुत ज्यादा फैल जाता है। हर वर्ष पटाखों की वजह से बहुत सी दुर्घटनायों की खबरें भी आती है। बहुत सी आग लगने की घटनायें भी सामने आती है। पटाखों से केवल वायु प्रदूषण ही नहीं होता बल्कि इससे ध्वनि प्रदूषण भी होता है। इस से किसी के भी कानों की सुनने की क्षमता भी जा सकती है।

क्यों सही नहीं है प्रतिबन्ध

वर्षों से दिवाली के दिन पटाखें चलाने की प्रथा चली आ रही है। ऐसी में एक दम से प्रतिबन्ध लगा देना उचित नहीं है। दिवाली भारत का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है और इसे सभी भारतवासी बड़े जोश और ख़ुशी में मनाते है। केवल हस्पताल और कुछ संवेदनशील जगह को छोड़ कर पटाखों के लिए अनुमति दी जा सकती थी। एक दम से प्रतिबन्ध लगाने से व्यापारियों को भी बहुत घाटा हुआ है। जिन व्यापारियों ने पटाखें ख़रीदें हुए है अब उन के लिए मुश्किल हो गयी है। अगर प्रतिबन्ध लगाना ही था तो इसे 3 महीने पहले ही लगा देना चाहिए था। इससे व्यापारियों को नुकसान न उठाना पड़ता।

वायु प्रदूषण एक बड़ी समस्या है और निश्चित रूप से प्रदूषण को काबू करना सब की ज़िम्मेदारी है। अब देखना यह है कि इस प्रतिबन्ध से कुछ असर पड़ता है या नहीं।

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