अब बच्चे स्कूलों में भी सुरक्षित नहीं रहें ,क्या सोचते है आप

माँ बाप अपने बच्चों को स्कूल में एक विश्वास के साथ छोड़ते है कि उनके बच्चे सुरक्षित है मगर जब कोई दिल दहला देने वाली घटना सामने आती है तो प्रश्न उठता है क्या वाकई स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा की परवाह की जाती है? रियान इंटरनेशनल स्कूल गुरुग्राम में एक सात साल के मासूम की हत्या ने यह सवाल फिर से उठा दिया है।

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सात साल के बच्चे प्रद्युमन की हत्या यह दिखलाती है कि स्कूल को सिर्फ अपनी फीस से ही अब मतलब रह गया है। उन्हें बच्चों की सुरक्षा से कोई मतलब नहीं रहा। प्रद्युमन की हत्या में आरोपी बस कंडक्टर ने अपना गुनाह कबूल करते हुए कहा कि वो चाकू साफ़ करने टॉयलेट गया था और वह बच्चे को देखकर उससे दुष्कर्म करने की कोशिश की। बच्चा डर कर चिल्लाने लगा तो उसने बच्चे की हत्या कर दी और भाग गया।
सबसे बड़ा सवाल यही है के बस कंडक्टर चाकू के साथ स्कूल के अंदर दाखिल कैसे हुआ और उसे बच्चों का वाशरूम इस्तेमाल करने कैसे दिया गया? क्या स्कूल में स्टाफ के लिए अलग वाशरूम नहीं था ?बस कंडक्टर को स्कूल में चाकू के साथ दाखिल कैसे होने दिया गया ?
मीडिया की खबरों के मुताबिक सीसीटीवी कैमरा भी ख़राब था। इतने बड़े इंटरनेशनल स्कूल में सीसीटीवी कैमरा ख़राब हो गया था तो उसे समय पर ठीक क्यों नहीं करवाया गया ? स्कूल फंड्स के नाम पर स्कूल अभिभावकों से अच्छी खासी फ़ीस वसूलते है मगर सुविधा के नाम पर कुछ नहीं दिया जाता। आज के समय में स्कूल बैग से लेकर के किताबें , यूनिफार्म तक स्कूल से मुहैया करवाया जाता है और उसके बदले में मोटी फ़ीस ली जाती है। अब स्कूल शिक्षा का मंदिर न रह कर पैसा कमाने का ज़रिया बन चुके है।

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क्या इस घटना के बाद अभिभावक स्कूल प्रबंधन पर दोबारा विश्वास कर पाएंगे? मीडिया में यह भी खबर है कि स्कूल के बच्चों से ही खून के छींटे साफ़ करवाए गए। यह स्कूल प्रबंधन की असहिष्णुता की पराकाष्ठा है। अब समय आ गया है माता पिता भी जागरूक हो और स्कूल का मूल्यांकन सिर्फ पढ़ाई न होकर बच्चों की सुरक्षा भी हो। दोस्तों, आप क्या सोचते है कि इस तरह महंगी महंगी फीस लेने वाले स्कूल प्रशासन पर क्या कोई करवाई होनी चाहिए या नहीं?

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